Monday, January 11, 2010
वर्ष भर सुख-समृद्धि के कुछ उपाय
मेष
मंगलवार के दिन लाल चंदन, लाल गुलाब के दो फूल, रोली का पैकेट लाल कपड़े में बांधें। प्रणाम करें और धूप-दीप दिखाकर तिजोरी में रख दें, इससे धन वृद्धि होगी।
चांदी का ‘श्री’ बनवाकर उसके चारों ओर सफेद तथा नीले जरकन जड़वा कर लॉकेट बनवाएं। शुद्ध कर शुक्रवार को श्रीमंत्र की तीन माला जाप के बाद गले में धारण करें।
श्रीगणोश यंत्र घर के पूजन स्थल पर रखकर नित्य दर्शन व पूजन करें। ओम गं गणपतये नम: का मूंगे की माला से तीन माला जाप करें, वर्ष भर दौलत कदम चूमेगी।
वृष
सोने या चांदी में श्री बनवा लें। हरा ऑनेक्स लगवाकर शुक्रवार को गले में धारण करें। श्री सूक्त का पाठ करें।
कमलगट्टे की माला पर श्रीयंत्र घर में स्थापित करें।
ओम गोपालाय उत्तरध्वजाय नम: का एक माला जाप करें। हरे रंग का रूमाल अपने पास रखें। गाय को प्रतिदिन तेल लगी रोटी दें।
वट वृक्ष के पत्ते पर कुमकुम से स्वस्तिक बनाएं। उस पर साबुत चावल व एक सुपारी रखकर माता लक्ष्मी के मंदिर में चढ़ा दें। इस उपाय से आर्थिक समृद्धि प्राप्त होगी।
मिथुन
धनदा यंत्र घर में स्थापित कर नित्य दर्शन करें तो आशातीत लाभ होगा।
भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर या मूर्ति के सम्मुख ú क्लीं कृष्णाय नम: का एक माला जाप तुलसी की माला से प्रतिदिन करें।
चांदी के पतरे पर चंद्र यंत्र तथा मंगल यंत्र बनवाकर क्रमश: मोती व मूंगा लगवाकर घर के मंदिर में बुधवार को स्थापित करें। जिनके ऊपर ऋण हो वह इस यंत्र के आगे ऋण्हर्ता मंगल स्तोत्र का पाठ करेंगे तो ऋण उतरने लगेगा।
पक्षियों को गुड़ के साथ सतनाजा डालें।
कर्क
चांदी की दो गायों की किसी विद्वान से प्राण प्रतिष्ठित कराकर एक गाय विद्वान को दक्षिणा सहित दान दें। दूसरी गाय कामधेनु दैव्ये की तरह घर के पूजन स्थल में रख कर नित्य दर्शन व पूजन करें, जो मांगेंगे वही प्राप्त होगा।
शिवयंत्र को घर के पूजन स्थल पर स्थापित करें व प्रतिदिन ú नम: शिवाय का एक रुद्राक्ष माला जप करें।
सुबह आजीविका संबंधी कार्य से पहले ú हिरण्यगर्भाय अव्यक्त रूपिणो नम: का मोती की माला से जाप करें।
ग्यारह रविवार दोपहर दही-भात का भोग लगाकर खाएं।
सिंह
दुर्गा मां की तस्वीर के आगे देवी के 108 नामों का नित्य स्मरण करें। यह कार्य वर्ष भर करें।
हरे गणपति (हकीक या ऑनेक्स के बने) घर के पूजन स्थल में स्थापित करें। ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र का पाठ करें। यदि ऋण है तो जल्द ही ऋण मुक्त हो जाएंगे।
ओम हीं घृणि सूर्य आदित्य श्री का नित्य सूर्य उदय के समय तीन माला जाप लाल चंदन की माला से करें।
मां लक्ष्मी को प्रतिदिन लाल पुष्प अर्पित करें। दूध से निर्मित नैवेद्य का भोग लगाएं। धन लाभ होगा।
कन्या
कूर्म पृष्ठ पर बने श्रीयंत्र या महालक्ष्मी यंत्र को घर के पूजा स्थल में स्थापित करें। श्री सूक्त का पाठ करें।
चांदी के पतरे पर गुरुमंत्र पर सुनहला लगवा कर शुद्ध करें। बुधवार को धूप-दीप दिखा कर गले में धारण करें।
सफेद गुंजा को लक्ष्मी मंत्रों से अभिमंत्रित कर चांदी की डिबिया में शहद में डुबो कर पूजा स्थल या तिजोरी में रखें।
तीन गोमती चक्र, तीन पीली कौड़ियां तथा तीन हल्दी की गांठें पीले कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रख दें। घर में धन वृद्धि व बरकत होगी।
तुला
श्रीलक्ष्मी सिद्ध यंत्र घर में स्थापित करें। रोज दर्शन कर ú लक्ष्मीनारायणाय नम: का स्फटिक माला से जाप करें।
यदि अचानक धनहानि होती हो, तो किसी भी मंदिर में कम से कम 40 शनि व सरस्वती चालीसा रखवाएं।
गरीब सुहागिन स्त्री को अपनी पत्नी के द्वारा सुहाग सामग्री दिलवाएं। सामग्री में कोई भी इत्र अवश्य रखें।
महीने में एक बार मिट्टी के कुल्हड़ में मशरूम भरकर किसी भी धार्मिक स्थान में रख आएं। मिट्टी के कुल्हड़ पर मिट्टी का ढक्कन अवश्य लगाएं।
वृश्चिक
श्रीहनुमान जी का यंत्र स्थापित कर नित्य पूजन-दर्शन करें।
धनदा यंत्र भी स्थापित कर नित्य दर्शन करें। ú नमो नारायणाय का तीन माला जाप चमत्कार से कम नहीं रहेगा।
इष्टदेव का स्मरण कर केसर का तिलक प्रतिदिन नाभि, कंठ व माथे पर लगाएं।
छह-छह ग्राम की चार ठोस चांदी की गोलियां सफेद कपड़े में लपेटकर हमेशा पास रखें। इससे समृद्धि के साथ-साथ शांति भी बनी रहेगी।
धनु
लाजवर्त नग को चांदी की अंगूठी में जड़वा श्रीमंत्र के जाप के साथ शुक्रवार को मध्यमा अंगुली में धारण करें।
ओम नमो भगवते वासुदेवाय का जाप स्फटिक माला से करें।
अशोक के वृक्ष की जड़ का पूजन कर तिजोरी में रखें। धन-संपत्ति की प्रचुरता वर्ष भर बनी रहेगी।
धन-संपदा के लिए तिजोरी के नीचे या तिजोरी के अंदर काली गुंजा के ग्यारह दाने रखें। नववर्ष के विशेष मुहूर्त में यह उपाय अवश्य करें।
मकर
सात पीपल के पत्ते लेकर कुमकुम से स्वस्तिक बनाएं। फिर कलावे से एक साथ सारे पत्तों को लपेटकर वीरान स्थान पर फेंक दें। आर्थिक संकट दूर हो जाएगा।
कुत्ते को पंद्रह दिन तक प्रतिदिन दूध पिलाएं। इन्हीं पंद्रह दिनों में मंदिर में भी दूध का दान दें।
प्रत्येक शुक्रवार को नियम से किसी भूखे को भोजन कराएं व रविवार को गाय को गुड़ खिलाएं।
घर में समृद्धि पोटली लगाएं। लाल रंग का रिबन, तांबे के सिक्के के साथ मुख्य द्वार पर बांधें।
कुंभ
सोने का गुरुयंत्र शुद्ध करके शुक्ल पक्ष के बृहस्पतिवार को गले में धारण करें। साथ ही चांदी की गाय घर के मंदिर में स्थापित करें व नित्य नियम से दर्शन करें।
ओम श्री उपेन्द्राय अच्युताय नम: का रुद्राक्ष की एक माला से नित्य जाप करें। धन की कोई समस्या नहीं रहेगी।
पंडितजी से पूर्णिमा को घर में सत्यनारायण कथा कराएं, उन्हें पांच वस्त्र, पांच फल, पांच मिठाई दक्षिणा सहित दें व आशीर्वाद पाएं।
कार्य सिद्धि यंत्र घर में स्थापित करें।
मीन
नववर्ष में मूंगे के गणपति स्थापित करें। ú एकदन्ताय विद्यमहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात मंत्र का जाप मूंगे की माला से नियमित करें।
मत्स्य यंत्र अवश्य स्थापित करें। नित्य विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें, धन की कमी नहीं होगी।
ड्रॉईंग रूम में उत्तर या पूर्व दिशा में एक्वेरियम रखें।
काली मिर्च के 5 दाने अपने सिर से 7 बार उतारकर 4 दाने चारों दिशाओं में फेंक दें तथा पांचवे दाने को आकाश की ओर उछाल दें। इससे आकस्मिक धन लाभ होगा।
Sunday, January 10, 2010
भाग्यशाली लोगों को होता है कन्या संतान योग
ज्योतिषशास्त्र में भी स्त्री एवं पुरुष भाग में बारह राशियां एवं सारे ग्रह विभाजित हैं। सूर्य, मंगल, गुरु पुरुष ग्रह हैं तो चंद्रमा, शुक्र, शनि स्त्रीग्रह हैं। बुध नपुंसक है तथा जिसके साथ बैठ जाता है वैसा ही फल प्रदान करने लग जाता है। राशियां भी छह स्त्री और छह पुरुष होती हैं। प्रकृति एवं ब्रrांड में सभी जगह दो शक्तियों का संतुलन बना रहता है। यही संतुलन ही आनंद देता है, असंतुलन तो अशांति प्रदान करता है।
शनि की बारह राशियों का परिभ्रमण 30 वर्ष में होता है और दो परिभ्रमण 60 वर्षो में पूरे होते हैं। सूर्य शनि का पिता है लेकिन शत्रुभाव रखता है और इसीलिए जब भी शनि सूर्य की राशि पर द्वितीय परिभ्रमण में आता है तो स्त्री-पुरुष का अनुपात व्यापक पैमाने पर गड़बड़ाने लगता है। आजकल भी शनि सूर्य की राशि सिंह पर ही परिभ्रमण कर रहा है। यह द्वितीय परिभ्रमण पूरा होने जा रहा है और इसीलिए सन् २क्क्७ से आगामी 60 वर्ष तक स्त्री वर्ग का वर्चस्व बढ़ता ही चला जाएगा।
ज्योतिष शास्त्र में भी स्त्रीग्रह बलवान तभी माने जाते हैं जब उनका संबंध पुरुष ग्रहों से रहता है। चाहे स्थान संबंध हो, दृष्टि संबंध या अन्योन्याश्रय संबंध। ठीक वैसे ही समाज में भी परिवार एवं व्यक्ति की शोभा तब तक ही है, जब तक दाम्पत्य में खुशहाली हो और गृहलक्ष्मी परम प्रसन्न हो। ग्रह, नक्षत्र एवं राशियों के संबंध भी हमारे पारिवारिक एवं सामाजिक रिश्तों की तरह नाजुक होते हैं। जैसे ग्रहयोग होते हैं हमारी चित्तवृत्ति भी वैसी ही बन जाती है। यही कारण है कि आजकल रिश्तों की मधुरता एवं मर्यादा में धर्मशास्त्र, ज्योतिष शास्त्र, व्यावहारिक शास्त्र आदि की महत्ता को हमने समाप्त कर दिया है। शास्त्रों में तो कहा गया है - दस कुएं बनाने पर जो पुण्य मिलता है वह एक बावड़ी बनाने पर मिल जाता है।
दस बावड़ी बनाने पर जो पुण्य मिलता है वह एक तालाब बनाने पर मिल जाता है और दस तालाब बनाने पर जो पुण्य मिलता है वह एक कन्यादान से मिल जाता है।
पुण्य कोई सुगंधित या सुंदर दिखने वाला पदार्थ नहीं होता है। यह आनंद अनुभूति की पराकाष्ठा होती है। उसकी निरंतरता तब ही संभव हो पाती जब दानपुण्य चलते रहते हैं। कन्यादान भी वही भाग्यशाली स्त्री-पुरुष कर पाते हैं जिनके संतान स्थान पर तृतीय स्थान, एकादश या व्यय भाव के स्वामी की दृष्टि पड़ रही हो अर्थात दान भाव के अधिपति एवं संतान भाव में संबंध बन रहा हो। तृतीय एवं एकादश भाव दान के कारक स्थान होते हैं और उनका संबंध पंचमेश, नवमेश से हो जाए तो कन्यादान के महापुण्य की प्रबल संभावना बन जाती है। इसीलिए कन्या संतान ही जन्म-जन्मांतर से मुक्ति दिलाने वाली होती है। कहा गया है,
श्रुत्वा कन्या प्रदातारं पितर: स पितामहा:। विमुक्त्वा सर्वपापेभ्यो ब्रrालोकं ब्रजन्ति ते॥
अत: पितामहों सहित पितर लोग कन्यादान देने वाले से अपने वंश को सुनकर सब पापों से मुक्त होकर ब्रrालोक को जाते हैं। पुत्र की कामना वाले दहेज लोभ के साथ कन्या लाते हैं। ऐसे लोग दोहरा दान ग्रहण करने से पातकी श्रेणी में आ जाते हैं और कन्यादान से ही उस ऋण से मुक्ति संभव हो पाती है। इसीलिए पुत्र प्राप्ति से अधिक महत्वपूर्ण योग कन्या प्राप्ति का होता है। पंचम, सप्तम एवं नवम भाव पर पुरुष ग्रहों की स्थिति कन्या संतान प्रदान करती है और स्त्री ग्रहों की युति पुरुष संतान प्रदान करती है। कन्या प्राप्ति के बिना मोक्ष संभव नहीं है और इसीलिए शनि का आगामी चक्र जनमानस में यह प्रबल धारणा बना देगा कि पुत्र संतान की अपेक्षा कन्या संतान पुण्य प्रदायिनी होती है।
जिन लोगों की पुरुष राशियां बलवान होती है उन्हें भी कन्या संतान की प्राप्ति होती है। यह विपरीत योग हुआ करता है। ऐसी स्थिति में मानसिक शांति एवं समृद्धि कन्या योग में ही होती है। कन्या ही देवी है, लक्ष्मी है, सरस्वती है और उसके विनाश का प्रयास उसे महाकाली के रूप में पैदा करने का निमंत्रण देता है।
कारोबारी परेशानियों से बचाता है ‘श्री लक्ष्मी गणेश मंत्र’
‘लक्ष्मीस्थानं त्रिकोणं स्यात्’ तथा
‘प्रथमं नवमं चैव धनमित्युच्यते बुधै:’।
कुंडली में चतुर्थ एवं दशम स्थान इच्छाशक्ति एवं कर्मठता के सूचक होने के कारण धन कमाने में सहायक होते हैं। दूसरी ओर षष्ठ, अष्टम एवं व्यय भाव, जो कर्ज, अनिष्ट एवं हानि के सूचक हैं, व्यापार में हानि और परेशानी देने वाले होते हैं।
कारोबार में परेशानी सूचक योग
महर्षि पाराशर ने अपनी कालजयी रचना ‘मध्यपाराशरी’ में व्यापार में हानि एवं परेशानी के सूचक निम्न योग बताए हैं-
* लग्नेश षष्ठभाव में और षष्ठेश लग्न या सप्तम भाव में हो तथा वह मारकेश से दृष्ट हो।
* लग्नेश एवं चंद्रमा, दोनों केतु के साथ हों और मारकेश से युत या दृष्ट हों।
* लग्नेश पाप ग्रह के साथ छठे, आठवें या 12 वें स्थान में मौजूद हो।
* पंचमेश एवं नवमेश षष्ठ या अष्टम भाव में हों।
* लग्नेश, पंचमेश या नवमेश का त्रिकेश के साथ परिवर्तन हो।
* लग्नेश जिस नवांश में हो, उसका स्वामी त्रिक स्थान में मारकेश के साथ हो।
* कुंडली में भाग्येश ही अष्टमेश या पंचमेश ही षष्ठेश हो और वह व्ययेश से युत या दृष्ट हो।
* जातक की कुंडली में केमद्रुम, रेका, दरिद्री, या भिक्षुक योग हो।
परेशानी से बचने का उपाय
वैदिक चिंतनधारा में व्यक्ति के विचार एवं निर्णयों को विकृत करने वाला तत्व ‘विघ्न’ तथा उसके काम-धंधे में रुकावटें डालने वाला तत्व बाधा कहलाता है। इन विघ्न-बाधाओं को दूर करने की क्षमता भगवान श्रीगणोश जी में है। मां लक्ष्मी तो स्वभाव से ही धन, संपत्ति एवं वैभव स्वरूपा हैं, इसीलिए व्यापार एवं काम-धंधे में आने वाली विघ्न-बाधाओं को दूर कर धन-संपत्ति प्राप्त करने के लिए श्रीलक्ष्मी गणोशजी के पूजन की परंपरा हमारे यहां आदिकाल से है।
श्री लक्ष्मीविनायक मंत्र :
ऊं श्रीं गं सौम्याय गणपतये वरवरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।
विनियोग :
ऊं अस्य श्री लक्ष्मी विनायक मंत्रस्य अंतर्यामी ऋषि:गायत्री छन्द: श्री लक्ष्मी विनायको देवता श्रीं बीजं स्वाहा शक्ति: सर्वाभीष्ट सिद्धये जपे विनियोग:।
करन्यास - अंगन्यास
ऊं श्रीं गां अंगुष्ठाभ्यां नम:। - ऊं श्रीं गां हृदयाय नम:।
ऊं श्रीं गीं तर्जनीभ्यां नम:। - ऊं श्रीं गीं शिरसे स्वाहा।
ऊं श्रीं गूं मध्यमाभ्यां नम:। - ऊं श्रीं गूं शिखायै वषट्।
ऊं श्रीं गैं अनामिकाभ्यां नम:। - ऊं श्रीं गैं कवचाय हुम्।
ऊं श्रीं गौं कनिष्ठकाभ्यां नम:। - ऊं श्रीं गौं नेत्रत्रयाय वौषट्।
ऊं श्रीं ग: करतलकरपृष्ठाभ्यां नम:। ऊं श्रीं ग: अस्त्रायं फट्।
ध्यान
दन्ताभये चक्रदरौदधानं कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जयालिंगितमब्धिपु˜या लक्ष्मीगणोशं कनकाभमीडे ।।
विधि
नित्य नियम से निवृत्त होकर आसन पर पूर्वाभिमुख या उत्तराभिमुख बैठकर आचमन एवं प्राणायाम कर श्रीलक्ष्मी विनायक मंत्र के अनुष्ठान का संकल्प करना चाहिए। तत्पश्चात चौकी या पटरे पर लाल कपड़ा बिछाएं। भोजपत्र/रजत पत्र पर असृगंध एवं चमेली की कलम से लिखित इस लक्ष्मी विनायक मंत्र पर पंचोपचार या षोडशोपचार से भगवान लक्ष्मी गणोश जी का पूजन करना चाहिए। इसके बाद विधिवत विनियोग, न्यास एवं ध्यान कर एकाग्रतापूर्वक मंत्र का जप करना चाहिए। इस अनुष्ठान में जपसंख्या सवा लाख से चार लाख तक है।
अनुष्ठान के नियम
* साधक स्नान कर रेशमी वस्त्र धारण करे। भस्म का त्रिपुंड या तिलक लगाकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला पर जप करना चाहिए। इस जप को परेशानियों का नाश करने वाला माना गया है।
* पूजन में लाल चंदन, दूर्वा, रक्तकनेर, कमल के पुष्प, मोदक एवं पंचमेवा अर्पित किए जाते हैं।
* भक्ति भाव से पूजन, मनोयोगपूर्वक जप एवं श्रद्धा सहित हवन करने से सभी कामनाएं पूरी होती हैं।
* अनुष्ठान के दिनों में गणपत्यथर्वशीर्षसूक्त, श्रीसूक्त, लक्ष्मीसूक्त कनकधारास्तोत्र आदि का पाठ करना फलदायक है।
Saturday, January 9, 2010
रवि मंत्र के जाप से दूर होती है दरिद्रता
‘दारिद्रदोषी गुणराशिनाशी’, दरिद्रता के इस परिणाम का प्रतिपादन करने वाले चिंतकों ने इसकी विवेचना करते हुए इस तथ्य को रेखांकित किया है कि ‘दरिद्रता की मानसिकता का सबसे बड़ा लक्षण आत्मविश्वास का अभाव है, जो दरिद्री की दुविधा, असुविधा, किंकर्तव्यविमूढ़ता एवं निष्क्रियता के भंवरजाल में फंसा होता है। वस्तुत: दरिद्रता के दर्द की टीस संसार में सबसे अधिक दुखदाई है।
दरिद्रता के योग
वैदिक ज्योतिष के प्रवर्तक महर्षि पाराशर के अनुसार व्यक्ति की जन्मकुंडली में त्रिकोणस्थान धन-संपदा एवं लक्ष्मी का स्थान तथा त्रिक (6, 8 एवं १२वां) स्थान दुख एवं दरिद्रता का होता है। व्यक्ति की कुंडली में केमद्रुम, रेका, कालसर्प भिक्षु एवं दरिद्री योग जीवन में विपन्नता देते हैं।
महर्षि पाराशर के अनुसार दरिद्रता में जातक के जीवन में हीनता एवं दीनता लगातार बनी रहती है। दरिद्रता के योगों में दो बातें प्रमुख होती हैं,
1. योग के प्रमुख ग्रह का त्रिकोणोश एवं शुभ ग्रह से युत-दृष्ट न होना।
2. उसका त्रिकेश एवं पापग्रह से युत-इष्ट होना या त्रिक स्थान में बैठना।
पाराशरीय ज्योतिष के अनुसार दरिद्रता के सूचक कुछ प्रमुख योग इस प्रकार हैं।
लग्न में चर राशि एवं चर नवांश हो और उस पर शनि तथा नीच राशिगत गुरु की दृष्टि हो।
लग्नेश निर्बल, धनेश अस्तंगत और केंद्र में पापग्रह हो।
धन स्थान में पापग्रह हो और उस पर पापग्रह की दृष्टि हो तथा धनेश निर्बल हो।
धनेश त्रिक (6, 8 एवं १२वें) स्थान में हो और पापग्रह धन स्थान में हो।
भाग्येश एवं कर्मेश त्रिक में और पापग्रह लग्न में हो।
लग्नेश, व्ययेश एवं सूर्य साथ-साथ हो और पापग्रह से दृष्ट हो।
धनेश व्यय स्थान में, व्ययेश धन स्थान में हो या भाग्येश अष्टम में और अष्टमेश भाग्य स्थान में हो।
भाग्येश एवं कर्मेश निर्बल होकर पापग्रह के साथ हों और लग्नेश त्रिक में हो।
पंचमेश एवं नवमेश षष्ठ या व्यय में और लग्नेश पाप प्रभाव में हो।
दरिद्रतानाशक रवि मंत्र
दरिद्रता के प्रभाववश व्यक्ति में आई हीनता, निष्क्रियता या किंकर्तव्यविमूढ़ता को नियंत्रित कर उसको कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ाने में आत्मविश्वास की भूमिका सबसे प्रमुख है। यह आत्मविश्वास रवि मंत्र के अनुष्ठान से बढ़ता है। रवि मंत्र दरिद्रता को दूर करने की रामबाण दवा है।
रवि मंत्र ऊं ह्रीं घृणिं सूर्य आदित्य श्रीं।
विनियोग
अस्य श्री सूर्य मंत्रस्य भृगऋषि: गायत्रीछन्द:, भगवान सूर्योदेवता, ह्रीं बीजं श्रीं शक्ति: सर्वार्थ सिद्धये जपे विनियोग:।
ऋष्यदिन्यास
ऊं भृगवे ऋषये नम:, शिरसि।
ऊं गायत्री छन्दसे नम:, मुखे।
ऊं सूर्याय देवतायै नम:, हृदि।
ऊं ह्रीं बीजाय नम:, गुह्ये।
ऊं श्रीं शक्तये नम:, पादयो:।
षडड्ग न्यास
सत्यतेजोज्वालामणो हुं फट् स्वाहा, हृदयाय नम:।
ब्रrातेजोज्वालामणो हुं फट् स्वाहा, शिरसे स्वाहा।
विष्णुतेजोज्वालामणो हुं फट् स्वाहा, शिखायै वषट्।
रुद्रतेजो ज्वालामणो हुं फट् स्वाहा, कवचाय हुम्।
अग्नितेजोज्वालामणो हुं फट् स्वाहा, नेत्रत्रयाय वौषट्।
सर्वतेजो ज्वालामणो हुं फट् स्वाहा, अस्त्राय फट्।
ध्यान
शोणाम्भोरुहसंस्थितं त्रिनयनं वेदत्रयी विग्रहं
दानाम्भोजयुगाभयानिदधतं हस्तै: प्रवालप्रभम्।
केयूराड्ंगदहारकंकणधरं कर्णोल्लसत्कुण्डलं,
लोकोत्पत्ति विनाशपालनकरं सरूय गुणाब्धिं भजे।।
अर्थात रक्तकमल पर विराजमान, तीन नेत्र वाले, वेदमूर्ति, चारों हाथों में क्रमश: दानमुद्रा, कमल, पद्म एवं अभयमुद्रा धारण करने वाले, प्रवाल जैसी आभा वाले, केयूर अड्ंगद, हार एवं कंकण आदि आभूषणों से सुशोभित, कानों में कुंडल धारण करने वाले, जगत की उत्पत्ति, पालन एवं विनाश करने वाले, भगवान सूर्य का मैं ध्यान करता हूं।
विधि
नित्य नियम से निवृत्त होकर आसन पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भस्म का त्रिपुण्ड या तिलक लगाएं। आचमन एवं प्राणायाम कर चौकी या पट्टे पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर स्वर्ण पत्र या भोजपत्र पर रक्तचंदन एवं अनार की कलम से श्री सूर्यपूजन यंत्र लिखकर और स्थापित कर विधिवत विनियोग, न्यास एवं ध्यान कर पंचोपचार (गंध-अक्षत, पुष्प, धूप, दीप एवं नैवेद्य) से यंत्र का पूजन कर, एकाग्रतापूर्वक उक्त मंत्र का जप करना चाहिए। इस मंत्र के अनुष्ठान में जप संख्या १0 लाख तथा लघु अनुष्ठान में सवा लाख है।
इस मंत्र के अनुष्ठान में उगते सूर्य को द्वादश नमस्कार, अघ्र्यदान एवं संध्यावंदन करना तथा जप के बाद आदित्य हृदयस्तोत्र का पाठ करना विशेष फलदायक होता है। इस मंत्र के अनुष्ठान से साधक में आत्मविश्वास का पुनर्विकास होता है, जिससे उसके जीवन में सफलता के नए द्वार खुलते हैं।
प्रो. शुकदेव चतुर्वेदी
सुखी दांपत्य जीवन : सितारों की भूमिका
हम बता रहे हैं नव वर्ष में सुखी और सुंदर दांपत्य जीवन की मनोकामना पूर्ण करने के लिए कुछ सरल उपाय।
मेष लग्न :
मेष का दाम्पत्य सुख का कारक ग्रह शुक्र होता है। ये लोग दांपत्य सुख के लिए निम्न उपाय करें - गाय व पक्षियों को चावल खिलाएं। चावल उबालकर, पकाकर देसी घी डालकर पक्षी को दें। गाय को प्रतिदिन दो रोटी तेल लगाकर दें। घर में बुजुर्ग महिलाओं का सम्मान करना चाहिए व आशीर्वाद लेना चाहिए।
वृष लग्न :
वृष लग्न में कारक ग्रह मंगल होता है। वृष लग्न के जातक लाल कपड़े में (सूती, चमकीला न हो) थोड़ी सी सौंफ बांधकर अपने शयनकक्ष में रखें। लाल चंदन का तिलक ललाट पर लगाएं। मंगलवार को हनुमान मंदिर में लाल चंदन दें। नया जूता-चप्पल जनवरी-फरवरी के महीने में न खरीदें।
मिथुन लग्न :
मिथुन लग्न में कारक ग्रह गुरु होता है। दांपत्य सुख के लिए ये गुरुवार का व्रत रखकर एक समय भोजन करें। प्रतिदिन तुलसी के पौधे के समक्ष घी का दीपक संध्या समय दो लौंग डालकर जलाएं व प्रणाम करें। रविवार को यह उपाय न करें। दाम्पत्य सुख के लिए माथे पर गोपीचंदन का टीका लगाना चाहिए।
कर्क लग्न :
कर्क लग्न में कारक ग्रह शनि होता है। इनका दाम्पत्य जीवन बहुत सुखी नहीं कहा जा सकता। दांपत्य सुख के लिए इन्हें प्रत्येक शनिवार को प्रात:काल पीपल वृक्ष के समक्ष तिल्ली के तेल का दीपक जलाना चाहिए। शनिवार व मंगलवार शाम के समय अपने जीवनसाथी के साथ हनुमान मंदिर जरूर जाना चाहिए।
सिंह लग्न :
सिंह लग्न में कारक ग्रह शनि होता है। ऐसे में निम्न उपाय करें-शनिपुष्य योग में नाव की कील का छल्ला बनवाकर मध्यमा उंगली में पहनें। राधाकृष्ण की मूर्ति के सामने तुलसी का पौधा एवं गंगाजल रखें। उसमें दो पत्ते तुलसी के डाल दें। दीपक, गुलाब की अगरबत्ती जलाएं। राधाकृष्ण की मूर्ति पर गुलाब का हार चढ़ाएं।
कन्या लग्न :
कन्या लग्न का कारक ग्रह गुरु होता है। ऐसे जातक निम्न उपाय करें- भगवान लक्ष्मीनारायण की आराधना करें। ग्यारह एकादशी में 17 प्रकार के फल, 7 प्रकार की विभिन्न दालें श्रद्धासहित हरिमंदिर यानी लक्ष्मीनारायण भगवान के आगे मंदिर में चढ़ानी चाहिए व एक घी का दीपक जलाना चाहिए।
तुला लग्न :
तुला लग्न का कारक ग्रह मंगल होता है। ये लोग निम्न उपाय करें-प्रथम मंगलवार का व्रत रखें। एक वक्त मीठे से भोजन करें। हनुमानजी को चोला चढ़ाएं। लाल फूल, चमेली का तेल, चांदी का वर्क, अनार अर्पित करें। 21 मंगलवार तक भगवान शिव पर लाल चंदन का लेप तथा लाल चंदन मंदिर में दान करना चाहिए।
वृश्चिक लग्न :
वृश्चिक लग्न का कारक ग्रह शुक्र होता है। इनके उपाय इस प्रकार हैं-मछलियों को मिश्रीयुक्त उबले चावल चढ़ाएं। राधाकृष्ण के मंदिर में गुरुवार की शाम को सुगंधित इत्र चढ़ाएं। प्रत्येक सोमवार एवं शुक्रवार को भगवान शिव को सफेद सुंगधित पुष्प चढ़ाने चाहिए। शिवलिंग पर सफेद चंदन का लेप करें।
धनु लग्न :
धनु लग्न का कारक ग्रह बुध होता है। दाम्पत्य सुख के लिए जातकों को भगवान गणपति की आराधना करनी चाहिए। हर बुधवार 21 दुर्वा, सिंदूर की डब्बी व पांच लड्डू वर्क लगाकर गणोश मंदिर में अर्पण करें। बुधवार के दिन हरे वस्त्र पहनें। हरे वस्त्र व हरी चूड़ियां बुधवार को किन्नरों को दान करें।
मकर लग्न :
मकर लग्न का कारक ग्रह चंद्रमा होता है। इन जातकों को गौरीशंकर रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार, प्रदोष, त्रयोदशी, सावन के सोमवार, इन शुभ योगों में धारण करें। चांदी का बना चंद्रमा यंत्र गंगा जल से पवित्र कर पूजा घर में रखें। हर पूर्णिमा पर गंगा जल से यंत्र को स्नान कराएं।
कुंभ लग्न :
कुंभ लग्न का कारक ग्रह सूर्य है। ऐसे जातक को प्रतिदिन सूर्य भगवान को तांबे के पात्र में जल चढ़ाना चाहिए। जल में सात बूंद गुलाब जल की डालें। तांबे का शुद्ध छेदवाला सिक्का शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार को लाल धागे में गले में धारण करें। पुरुष दाहिने हाथ की व स्त्रियां बाएं हाथ की रिंगफिंगर में ब्लू टोपाज रत्न पहनें।
मीन लग्न :
मीन लग्न का कारक ग्रह बुध होता है। इन जातकों को भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। बुधवार के दिन कन्याओं को हरे रंग के वस्त्र उपहार स्वरूप भेंट करें। सात अशोक वृक्ष के पत्ते शुक्ल पक्ष में सोमवार को घर के मंदिर में रखें। धूप-दीप से पूजा करें। मुरझाने पर नए पत्ते लाकर पुराने पत्तों को पीपल के नीचे रख दें।
जल भरे कुंड से लाएं घर में समृद्धि
परिवार में सुख और समृद्धि के लिए ईशान कोण स्थित जलस्रोत को हमेशा भरा हुआ ही रखें। उसके पानी का उपयोग भी करें तो बराबर उसमें पूर्ति करते जाएं। यह धनागम के स्रोतों को हमेशा खोले रखता है।
घर के ईशान कोण में जलस्रोत का होना बहुत शुभ है। आजकल इस कोण में बोरिंग करवाने का चलन है, किंतु वहां जलस्रोत या हौज का होना शास्त्र सम्मत है। यह शिव का स्थान है। इसी कारण इसे गंगोद्भव तुल्य माना जाता है।
वास्तु में इसी कोने को पूजा स्थल, उपासना स्थल और इष्ट देव स्थापना योग्य कोण भी माना जाता है, किंतु यहां जल स्थान का होना लाभकारी है। जिन घरों में इस स्थान पर जलस्रोत होता है, वह खुशियों का केंद्र होता है। वैसे तो जल-स्थान के लिए वरुण या पश्चिम दिशा भी अच्छी है, किंतु ईशान कोण अधिक लाभकारी माना गया है।
वास्तुग्रंथों के अतिरिक्त दकार्गल विद्या (भूमिगत जलस्रोत खोजने की कुंजी) में भी शिव के कोने या ईशान कोण को अच्छी जलधारा का केंद्र माना गया है। इस क्षेत्र की जल धारा को शंकरी कहा जाता है। यह प्राय: मीठी और अल्पदाब से जलापूर्ति में सहायक होती है। यदि ईशान के जल-स्रोत को बराबर भरा रखा जाए और उसके जलस्तर को बराबर बनाए रखा जाए तो समृद्धि आती है।
यदि नया घर बनाना हो तो सर्वप्रथम इस कोण में जलस्रोत बनाकर उसे भर दिया जाए और परिसर में गाय को बछड़े सहित लाकर कुछ दिन बांध दिया जाए तो कार्य बिना बाधा के संपन्न होता है। ‘मयमतं’ ग्रंथ में भूमि चयन के साथ ही वहां ‘सवत्सा गो’ बांधने का निर्देश है।
यदि इस जलस्रोत में चांदी की छोटी-सी मछली, शंख, मकर, लघु कलश, कल्पवृक्ष और चांदी का ही कूर्म बनाकर रखा जाए और पूजा के बाद जल भरा जाए तो इच्छित परिणाम मिलता है। यदि इसी दिशा में तुलसी क्यारा और बिल्व वृक्ष हो तो सोने पर सुहागा मानना चाहिए।
डॉ. श्रीकृष्णMonday, January 4, 2010
भविष्यफल - जनवरी 2010
वृष ( TAURUS):- आजीविका और रोजगार के लिए यह महीना युवा जातकों के लिए भाग्योदयकारी होगा। रोजगार की तलाश पूरी होगी। हाल ही में शुरू किए गए व्यवसाय या छोटे स्तर की सेवा परियोजना से भी आमदनी के आसार नजर आएंगे। काई व्यक्ति आप पर भारी उपकार करेगा। इस महीने के उत्तरार्ध में आप कुछ विस्मयकारी घटनाओं के बीच अपने साहस को देखेंगे और किसी नए जीवन की वरदान राशि को लेकर चमत्कृत होंगे। अनेक महानुभाव अपने परिश्रम और चेष्टाओं के सिद्धकारक परिणाम भी महसूस करेंगे।
मिथुन ( GEMINI):- इस महीने का पहला हिस्सा भी शुभ गोचर से युक्त है। लाभकारी योजनाओं में धन लगाना उचित रहेगा। किसी मांगलिक कार्य या उत्सव में धन खर्च होगा। अच्छे स्वास्थ्य और स्फूर्ति के संचार होने से कष्टप्रद और जोखिम कार्य भी सरलता से बनते नजर आएंगे। बाद के हिस्से में सीनियर्स के प्रति जिम्मेदारियां पूरी होंगी। परन्तु कुछ जातकों का स्वास्थ्य बिगड़ जाने से उनके काम में बाधा आ सकती है। किसी कार्य विशेष के न बन पाने से पैसे की चिंता बनी रहेगी। सामाजिक क्षेत्रों में मान सम्मान की स्थिति यथावत बनी रहेगी। साल का पहला महीना कुछ रुकावटों के बाद भी सुख संतोष से बीत जाएगा।
कर्क ( CANCER):- इस महीने का पहला हिस्सा पत्नी , बेटे और भाइयों की ओर से कुछ आर्थिक संकट देने वाला होगा , फिर भी प्रभावशाली व्यक्ति और अच्छे सम्पर्क आपके काम आएंगे। बिजनस में आर्थिक स्थिति सुधरेगी। सुनियोजित कामों में समय पर लाभ होने लगेगा। महीने के दूसरे हिस्से में अच्छे संदेश और समाचार प्राप्त होंगे। उद्योग व्यापार को नई दिशा मिलेगी। काम बिगाड़ने वाले तत्व रोजमर्रा की जिंदगी से हट जाएंगे। निर्भय होकर आप अपने कामकाज को सफल बनाने में जुट जाएंगे।
सिंह ( LEO):- इस महीने का पहला हिस्सा काफी खर्च लेकर आएगा। शरीर में अचानक विकार या रोग पैदा हो सकते हैं। घर में मेहमान आदि के स्वागत में भी आडम्बरपूर्ण खर्च संभव है। आजीविका आदि में सहयोगियों के साथ तनाव और सीनियर अधिकारियों के बीच बहसबाजी से मान प्रतिष्ठा घट सकती है। इस महीने के दूसरे हिस्से में जब सूर्य आपकी छठी राशि पर संचार करेगा तो लोग आपके वक्तव्य को सत्य वचन कहकर स्वीकार कर लेंगे।
कन्या ( VIRGO) :- यह महीना अनुकूल वक्त और फायदों से भरपूर रहेगा। हालांकि स्वभाव में कुछ चंचलता आएगी , फिर भी आपके कहे गये शब्दों का सर्वत्र सम्मान होगा। आर्थिक पक्ष के अलावा आपका राजनीति दायरा भी इस बीच मजबूत होगा। जनमत और लोकमत के जरिए किसी प्रतिस्पर्धा में भी आप विजयी होंगे। इस महीने का दूसरा हिस्सा कुछ खर्चीला रहेगा और नुकसान भी करा सकता है।
तुला ( LIBRA):- इस महीने के आरंभ में विभिन्न प्रयासों , भरपूर परिश्रम और हितचिन्तकों के सहयोग से ही वांछित लाभ सम्भव होगा। एक साथ कई तरह के व्यापार या काम धन्धों में लाभ होगा। प्रतिस्पर्धा की दौड़ में आगे निकल जाएंगे। घर परिवार की व्यवस्था संतोषजनक रहेगी। विरोधियों और आलोचना करने वालों के मुंह बन्द रहेंगे। महीने का पिछला हिस्सा भी सुख सौभाग्य बढ़ाने वाला है।
वृश्चिक ( SCORPIO):- इस महीने के आरंभ में रुका धन प्राप्त होगा। नौकरी अथवा आजीविका में बदलाव की संभावना रहेगी। घर के दायरे में भी परिवर्तन की संभावना है। इस महीने के आखिरी हिस्से में निवेश किये गये धन का लाभ मिलेगा। बिजनस में तरक्की होगी। सज्जनों और सन्त महात्माओं के दर्शन लाभ करेंगे। बुजुर्गों और पैतृक संबंधों में सहयोग और प्रोत्साहन मिलेगा। किसी काम में मनोवांछित लाभ कुछ रुक - रुक कर होने से चिंताएं बढेंगी।
धनु ( SAGITTARIUS) :- इस महीने में गिरते कारोबार की ओर ध्यान दें। कार्य क्षेत्र की स्थिति असन्तोषजनक होगी। अधिकारी के व्यवहार से निराशा बढ़ेगी। पार्टनर के साथ वैचारिक मतभेद होगा। सुख में कमी होगी। मेहनत अधिक होगी। व्यस्तता बढ़ेगी। बौद्धिक श्रम बढ़ेगा। महीने के मध्य तक भाग्य साथ देगा। आत्मविश्वास से जिम्मेदारी पूरी कर सकेंगे। खर्च के कारण संतान के विवाह प्रस्तावों में निर्णय लेना कठिन हो सकता है। किसी व्यापारी मित्र से शत्रुता प्रतिष्ठा के लिए चुनौती बन जाएगी। परिश्रम से आय बढ़ेगी। धन - संग्रह होगा।
मकर ( CAPRICORN) :- इस महीने किसी मूल्यवान वस्तु के खर्च हो जाने से निराशा होगी। नये आदेश और काम का बोझ कष्टप्रद सिद्ध होगा। सम्भव है आजीविका बदलने का विचार बने। आपका व्यवहार खीझ भरा रहेगा। जो भी हो रहा है स्वयं को उससे अलग अनुभव करें। अपना ध्यान अन्य विषयों की ओर मोड़ देना ठीक होगा। बिजनस पार्टनर के व्यवहार में अप्रत्याशित बदलाव हो सकता है। सूझबूझ से स्थिति का लाभ उठाएं।
कुंभ ( AQUARIUS):- इस महीने का सम्पूर्ण भाग शक्तिशाली गोचर से युक्त है। देश विदेश की यात्रा या सम्पर्कों के माध्यम से आजीविका और व्यापार में उन्नति अर्जित करेंगे। समतुल्य लोगों में साख बढ़ेगी। किसी नये काम की प्रेरणा से धन और समय का निवेश भी सुनिश्चित होगा। परन्तु सूर्य प्रधान व्यक्ति आलस्य एवं दरिद्रता के शिकार होंगे। घर परिवार के बीच अनावश्यक झगड़े क्लेश आदि से खिन्नता होगी। इसी कारण धन की आवक भी समय पर नहीं हो पाएगी।
मीन ( PISCES) :- इस महीने का पहला हिस्सा व्यक्तिगत जीवन या कार्यक्षेत्र के विवादों को सुलझाने में बीतेगा। सहयोगी और मित्रों के काम और निष्ठा के प्रति शिकायत रहेगी। लापरवाही और अति विश्वास के कारण भी किसी प्रकार की हानि से आर्थिक कष्ट अनुभव करेंगे। सरकारी सर्विस से जुड़े हुए लोग उच्चाधिकारियों से विवाद बढ़ जाने के कारण चिंतित रहेंगे। महीने के दूसरे हिस्से में कार्यक्षेत्र और पराक्रम वृद्धि धीरे - धीरे सहायक होने लगेगी। विशेष प्रकार के कार्यभारों को निपटाने में सक्रियता रहेगी। घर - परिवार के बीच चिंता और अशांति का वातावरण छंट जाएगा।
पं0 केवल आनन्द जोशी
ज्योतिषाचार्य