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Saturday, March 20, 2010

कैसे बनाएँ घर को वास्तु के अनुकूल?


घर केवल ईंट, चूने और पत्थर की आकृति वाले घरौंदे का नाम ही नहीं है। 'घर' का अर्थ उस स्थान से है जहाँ परिवार चैन-सुकून की तलाश करता है। यदि वास्तु को ध्यान में रखकर घर का निर्माण किया जाए तो वास्तुदोषों के दुष्परिणामों से बचा जा सकता है।

वर्तमान के बदलते दौर में वास्तु का महत्व दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। आजकल कई बड़े-बड़े बिल्डर व इंटीरियर डेकोरेटर भी घर बनाते व सजाते समय वास्तु का विशेष ध्यान रखते हैं। वास्तु के अनुसार ही वे कमरे की बनावट, उनमें सामानों की साज-सज्जा करते हैं। इससे घर की खूबसूरती बढ़ने के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रवाह होता है।

वास्तु के अनुसार घर की सजावट करते समय निम्न बातों का ध्यान रखें :-
1) घर के प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक अथवा 'ॐ' की आकृति लगाने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
2) जिस भूखंड या मकान पर मंदिर की पीठ पड़ती है, वहाँ रहने वाले दिन-ब-दिन आर्थिक व शारीरिक परेशानियों में घिरते रहते है।
3) समृद्धि की प्राप्ति के लिए नार्थ-ईस्ट दिशा में पानी का कलश अवश्य रखना चाहिए।
4) घर में ऊर्जात्मक वातावरण बनाने में सूर्य की रोशनी का विशेष महत्व होता है इसलिए घर की आंतरिक साज-सज्जा ऐसी होनी चाहिए कि सूर्य की रोशनी घर में पर्याप्त रूप में प्रवेश करे।
5) घर में कलह अथवा अशांति का वातावरण हो तो ड्राइंग रूम में फूलों का गुलदस्ता रखना श्रेष्ठ होता है।
6) अशुद्ध वस्त्रों को घर के प्रवेश द्वार के मध्य में नहीं रखना चाहिए।
7) वास्तु के अनुसार रसोईघर में देवस्थान नहीं होना चाहिए।
8) गृहस्थ के बेडरूम में भगवान के चित्र अथवा धार्मिक महत्व की वस्तुएँ नहीं लगी होना चाहिए।
9) घर में देवस्थान की दीवार से शौचालय की दीवार का संपर्क नहीं होना चाहिए।



- गायत्री शर्मा

वाहन हादसों से बचा सकता है वास्तु


वास्तु की मान्यताओं के विकास काल में प्राय: हाथी, घोड़ों और उनसे चलने वाले रथ, पालकी आदि वाहनों पर ही विचार किया गया किंतु वे ही मान्यताएं वर्तमान वाहनों के संदर्भ में भी सर्वथा प्रासंगिक है। वाहन दरअसल मानवीय जीवन की अहम आवश्यकता है और सहायक भी कम नहीं हैं। यदि किसी के पास वाहन नहीं हो और वह वाहन की अपेक्षा करता हो तो उसे वेदोक्त ‘पवमान सूक्त’ का संपुट सहित पाठ करना चाहिए। यह पाठ परिवार में शांति व सुख का संचार भी करता है और वाहन जन्य आकस्मिक हादसों से बचाने वाला भी है।

भवन में सामान्यत: वायव्यकोण में वाहनों को रखना चाहिए। आजकल प्राय: भवन निर्माण के समय वाहन के लिए किसी भी एक दिशा में लम्बवत गलियारा छोड़ दिया जाता है और उसके साथ ही दरवाजा भी रख दिया जाता है। यहां यह ज्ञातव्य है कि गृहपति के आने-जाने के दरवाजे के अतिरिक्त वाहन के लिए अलग द्वार होना चाहिए। वास्तु विन्यास की परंपरा में ऐसा आवश्यक है। इसके लिए भवन के सामने के भाग की जो लम्बाई या चौड़ाई हो, उसको नौ भागों में बांट दें और प्राय: दोनों ओर से दो-दो खंडों को छोड़कर वाहन के लिए द्वार रखना चाहिए।

भवन में वायव्य कोण से लेकर नैऋत्य कोण की ओर की दीवार पर नौ-नौ भागों के अनुसार पहले दो और आखिरी दो खंड छोड़कर दरवाजा रखना बहुत शुभ माना जाता है। भवन का निर्माण कुछ इस तरह से किया जाना चाहिए कि वाहन एकदम उत्तरी दीवार के पास नहीं खड़ा रहे बल्कि उससे दो खंड की दूरी बनी रहे। वायव्यकोण के निकट, दीवार से आगे दो खंड छोड़कर दरवाजा रखने से परिवार में शोक और दु:ख की आशंका नहीं के बराबर रहती है जैसा कि वास्तुप्रदीप का मत है। ऐसे में तीसरे, चौथे खंड पर वाहन के लिए दरवाजा होना बहुत शुभ है। ऐसा होने पर वाहन संचालन में भी उचित समय पर उचित निर्णय होता है और भ्रम या चूक की संभावना नहीं के बराबर रहती है। यहां यह भी नियम है कि कभी वायव्य कोण से लगता हुआ कोई रेंप घर की सीमा से बाहर नहीं बनाए। हां, भवन के भीतर बनाया जा सकता है। बाहर बने रेंप से मतिभ्रम, व्यर्थ विवाद ऐसी स्थितियां देखने में आई हैं।


-डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू

पोलियो का ज्योतिषीय निदान

पोलियो बाल्यावस्था में होने वाली ऐसी बीमारी है जिसका दंश जीवनभर झेलना पड़ता है। इसमें हड्डियां सूखकर वक्रीय हो जाती है। पिछले कुछ वर्षो से विश्वभर में पोलियो उन्मूलन के प्रयास चल रहे हैं। शिशु को जन्म से पांच साल तक की उम्र में पोलियोरोधी खुराक पिलाने से इस रोग की आशंका लगभग समाप्त हो जाती है।

इस रोग के मूल में शनि को भी देखना चाहिए। ज्योतिषीय दृष्टि से इसके कारणों में शनि और उसकी राशियों मकर एवं कुंभ पर पाप ग्रह का प्रभाव होना है। उक्त राशियों में मौजूद चंद्रमा पर पाप दृष्टि हो, शनि यदि अस्तगत, नीचत्व प्राप्त हो व त्रिक्भाव में त्रिकेशों के साथ हो अथवा मेष राशि में पापी ग्रह हो तो पोलियो की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे जातक को विशेष रूप से पूर्वोपचार करना चाहिए। इसी प्रकार जातक की कुंडली के पांचवें, सातवें और ग्यारहवें भाव में पापी ग्रह भी इस रोग के सहायक हो सकते हैं।

कारण : पोलियो पीड़ितों की कुंडली देखने से प्रतीत होता है कि शनि अपनी नीच राशि मेष में आठवें भाव में स्थित है और त्रिकेश मंगल से भी पीड़ित है। चंद्रमा शनि की कुंभ राशि में राहु के साथ है और कोई शुभ दृष्टि नहीं होने से जातक आजीवन पोलियोजन्य त्रासदी भोगता है।

ज्योतिषीय परामर्श : पोलियोरोधी खुराक पिलाना सबसे उचित है। इसके अलावा जिसकी कुंडली में ऊपर दर्शाए गए ग्रह योग बने हों, उसके परिजनों और जिनको यह रोग हो चुका हो, उनको शनि व चंद्रमा की वस्तुओं का दान करना चाहिए। साथ ही इन ग्रहों के मंत्रों का जाप भी करना या करवाना चाहिए।

रोज शाम या रात्रि के समय महामृत्युंजय महामंत्र की एक माला करनी चाहिए। यह जाप ऊनी आसन पर बैठकर शिव आराधना के साथ करना बहुत प्रभावी माना गया है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में आया है कि दूध में लहसुन का प्रयोग करें। आधा किलो दूध में पांच कली लहसुन कूटकर डालें और तब तक उबालते रहें, जब तक कि दूध आधी कटोरी रह जाए। इसमें कुछ शक्कर डालकर पंद्रह दिनों तक सुबह पीने से लाभ मिलता है। यह प्रयोग शनिवार से करना चाहिए।


-पं. पुष्कर राज

Friday, March 19, 2010

जल भरे कुंड से लाएं घर में समृद्धि

eshan ईशान कोण को अच्छी जलधारा का केंद्र माना गया है। वास्तु में इसी कोने को पूजास्थल, उपासना स्थल और प्रधान इष्ट देव स्थापना का योग्य कोण भी माना जाता है, किंतु यहां जल स्थान का होना बहुत ही लाभकारी है।

परिवार में सुख और समृद्धि के लिए ईशान कोण स्थित जलस्रोत को हमेशा भरा हुआ ही रखें। उसके पानी का उपयोग भी करें तो बराबर उसमें पूर्ति करते जाएं। यह धनागम के स्रोतों को हमेशा खोले रखता है।

घर के ईशान कोण में जलस्रोत का होना बहुत शुभ है। आजकल इस कोण में बोरिंग करवाने का चलन है, किंतु वहां जलस्रोत या हौज का होना शास्त्र सम्मत है। यह शिव का स्थान है। इसी कारण इसे गंगोद्भव तुल्य माना जाता है।

वास्तु में इसी कोने को पूजा स्थल, उपासना स्थल और इष्ट देव स्थापना योग्य कोण भी माना जाता है, किंतु यहां जल स्थान का होना लाभकारी है। जिन घरों में इस स्थान पर जलस्रोत होता है, वह खुशियों का केंद्र होता है। वैसे तो जल-स्थान के लिए वरुण या पश्चिम दिशा भी अच्छी है, किंतु ईशान कोण अधिक लाभकारी माना गया है।

वास्तुग्रंथों के अतिरिक्त दकार्गल विद्या (भूमिगत जलस्रोत खोजने की कुंजी) में भी शिव के कोने या ईशान कोण को अच्छी जलधारा का केंद्र माना गया है। इस क्षेत्र की जल धारा को शंकरी कहा जाता है। यह प्राय: मीठी और अल्पदाब से जलापूर्ति में सहायक होती है। यदि ईशान के जल-स्रोत को बराबर भरा रखा जाए और उसके जलस्तर को बराबर बनाए रखा जाए तो समृद्धि आती है।

यदि नया घर बनाना हो तो सर्वप्रथम इस कोण में जलस्रोत बनाकर उसे भर दिया जाए और परिसर में गाय को बछड़े सहित लाकर कुछ दिन बांध दिया जाए तो कार्य बिना बाधा के संपन्न होता है। ‘मयमतं’ ग्रंथ में भूमि चयन के साथ ही वहां ‘सवत्सा गो’ बांधने का निर्देश है।

यदि इस जलस्रोत में चांदी की छोटी-सी मछली, शंख, मकर, लघु कलश, कल्पवृक्ष और चांदी का ही कूर्म बनाकर रखा जाए और पूजा के बाद जल भरा जाए तो इच्छित परिणाम मिलता है। यदि इसी दिशा में तुलसी क्यारा और बिल्व वृक्ष हो तो सोने पर सुहागा मानना चाहिए।


-डॉ. श्रीकृष्ण

Wednesday, February 17, 2010

जन्म-समय का आप पर प्रभाव

जन्म-समय सुबह 4 से 6 बजे
आपका सूर्य पहले घर में मौजूद है। यह आपको अच्छा स्वास्थ्य और आत्मविश्वास दे रहा है। आप किसी भी बात को लेकर दृढ़ संकल्पित रहते हैं और आपका भविष्य अच्छा है।

जन्म समय सुबह 6 से 8 बजे
आपका सूर्य 12वें घर में है, यह आपकी जिंदगी में ऐसे रहस्यपूर्ण बदलाव लाएगा जिसकी व्याख्या करना मुश्किल है। सख्त दिनचर्या अपनाएं और अपने दिमाग को शांत बनाए रखें। आय के मुकाबले खर्च अधिक हो सकते हैं।

जन्म समय सुबह 8 से 10 बजे
आपका सूर्य 11वें घर में है। इसके मायने हैं कि आपके ढेर सारे दोस्त होंगे, सामाजिक संबंध बनाने के लिए आपको पैसों की जरूरत होगी। ज्यादातर समय शुभचिंतकों और दोस्तों से हाल-चाल जानने में ही बीतेगा। आपको लगेगा कि आप जितने के हकदार हैं, उससे कहीं अधिक हासिल कर रहे हैं।

जन्म समय सुबह 10 से 12 बजे
आपका सूर्य 10वें घर में मौजूद है। पश्चिमी और भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह सूर्य का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। आप अपने प्रोजेक्ट्स और प्लान्स को सफलतापूर्वक पूरा करेंगे। आप सर्वश्रेष्ठ साबित होंगे। शक्ति का दुरुपयोग आपको परेशानी में डाल सकता है।

जन्म समय दोपहर 12 से 2 बजे
आपका सूर्य 9वें घर में है। यह स्थिति आपके यात्रा से भरी जिंदगी जीने, दार्शनिक, धार्मिक, तेज दिमाग, परोपकारी स्वभाव और प्रसिद्ध होने की ओर संकेत करती है। 9वां घर अच्छे भविष्य का है और आप भाग्य को अपने ऊपर मुस्कुराता महसूस कर सकते हैं। आपका स्वभाव परोपकार और दयालुता से भरा है।

जन्म समय दोपहर 2 से शाम 4 बजे
आपका सूर्य आठवें घर में है जो कि मुद्रा संबंधी मामलों जैसे ऋण, ट्रस्ट, सार्वजनिक फंड, बैंक आदि में खास दखल होने का संकेतक है। कई ज्योतिषी इसे सेक्स और दुर्घटनाओं से भी जोड़कर देखते हैं। कानूनी मसलों का सामना करना पड़ सकता है।

जन्म समय शाम 4 से 6 बजे
आपका सूर्य सातवें घर में है, जिसे सामान्यत: साझेदारियों का घर कहा जाता है। शादी आपको दूसरे लोगों के मुकाबले अधिक प्रभावित करेगी। इसलिए इसे सफल बनाने का प्रयास करें, भले ही इसके लिए आपको कठिन मेहनत क्यों न करनी पड़े। ऐसे पेशे या व्यवसाय को चुनें जो आपको लोगों से सीधे संपर्क करने की आजादी देता हो। चूंकि सातवां घर आपके दुश्मनों का भी है, ऐसे में कानूनी दिक्कत आ सकती हैं।

जन्म समय शाम 6 से रात्रि 8 बजे
आपका सूर्य छठवें घर में है, इसका मतलब यह है कि आपकी जिंदगी का बहुत कुछ साथियों और अधीनस्थों से आपको मिलने वाले सहयोग पर निर्भर करेगा। यह समाजसेवा की ओर भी संकेत करता है और आपको लोगों के स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा। अत्यधिक सतर्कता और परिश्रमी होने की आपकी आदत आपको लंबे समय तक कामयाबी और सम्मान दिलाएगी।

जन्म समय रात्रि 8 से 10 बजे
आपका सूर्य पांचवें घर में मौजूद है जो आपको कलाकार वाली क्षमता और कौशल देगा। यह आपको जिंदगी के प्रति आशावादी नजरिया और मौके तलाशने की इच्छाशक्ति देगा। आपकी रुचि व्यवसाय में तब्दील हो सकती है। आप स्टेज और वास्तविक जिंदगी, दोनों में अभिनय करने वाले महान प्रेमी साबित हो सकते हैं, लेकिन इसके अतिरेक से बचें।

जन्म समय रात्रि 10 से 12 बजे
आपका सूर्य चौथे घर में है जो घर और संपत्ति के लिहाज से बेहतरीन स्थान है। आप जमीन, रियल एस्टेट से लाभ अर्जित कर सकते हैं। आपके अभिभावक आपकी जिंदगी को बनाने या बिगाड़ने में उल्लेखनीय भूमिका निभा सकते हैं।

जन्म समय रात्रि 12 से 2 बजे
आपका सूर्य तीसरे घर में मौजूद है जो आपकी बौद्धिक क्षमता, यात्रा करने की चाहत और उच्च स्तर के रोमांच को दर्शाता है। आप पत्रकारिता या टीवी जर्नलिज्म से जुड़ सकते हैं। आपके भाई-बहन और पड़ोसी या तो आपको बना देंगे या बिगाड़ देंगे, लेकिन यह निश्चित है कि इनका आपके जीवन पर गहरा प्रभाव रहेगा। सूर्य की स्थिति आपको बेहतरीन सामाजिक जीवन देगी।

जन्म समय रात्रि 2 से तड़के 4 बजे
आपका सूर्य दूसरे घर में है। यह वित्त और परिवार का घर है। इसका मतलब है कि आप पैसे बनाने में कामयाब होंगे, भले ही आप इसे संभाल न पाएं। भारतीय ज्योतिष में दूसरे घर को वाककला और भोजन का घर माना जाता है। आप एक महान वक्ता हो सकते हैं, आपके पास पैसा भी होगा।

Tuesday, February 16, 2010

व्यवस्थित घर में आती है सुख और संपदा

व्यवस्थित घर सुख ही नहीं, बल्कि समृद्धि भी देता है जबकि अव्यवस्थित घर न केवल परेशानियां देता है बल्कि झगड़ों, स्वास्थ्य समस्याओं समेत बेवजह धन और ऊर्जा का अपव्यय भी करवाता है। अत: घर में कभी फालतू चीजें नहीं रखें, सामान को बिखराकर नहीं रखें।

हमारी सनातन परंपरा में घर को आश्रम का दर्जा दिया गया है। गृहस्थी को साधना से कम नहीं माना गया है। जिस घर में साजो सामान व्यवस्थित हो, जो चीज जहां चाहिए, वहीं हो तो ऐसा व्यवस्थित घर सुख ही नहीं, बल्कि समृद्धि भी देता है जबकि अव्यवस्थित घर न केवल परेशानियां देता है बल्कि झगड़ों, सिरदर्द, बेवजह दिक्कतों के साथ-साथ धन और ऊर्जा का अपव्यय भी करवाता है।

वास्तुशास्त्र वस्तुत: गृह-निर्माण में संतुलन पर सर्वाधिक जोर देता है। निर्माण के समय दिशा, काल और स्थान के अनुसार जो चीज जहां पर होनी चाहिए, तद्नुसार ही नियमों का निर्देश किया गया है। घर से बड़ा कोई स्वर्ग नहीं, ऋषि-मुनि ही नहीं, देवता तक गृहस्थ के आश्रित कहे गए हैं। गृहस्थ को यह निर्देश है कि वह परिवार में स्थान, वस्तुओं के संतुलन के साथ ही वैचारिक समरसता भी बनाए रखें।

वास्तुमंडनम् के दूषणभूषणाध्याय में गृह और गृहस्थी के नियमों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। इसमें कहा गया है कि घर में कभी फालतू चीजें नहीं रखें, सामान को बिखराकर नहीं रखें। रसोई के बर्तनों से लेकर पुस्तकों, बनाव-श्रंगार के सामान, कांच, कंघी तक को व्यवस्थित रखें। इनके बिखरे होने पर संपत्ति का क्षय होता है। जिस घर में महिलाओं के केश उड़ते रहते हैं, वहां मर्यादा का उल्लंघन होता और लक्ष्मी रुष्ट हो जाती है।

जहां बार-बार नमक बिखरता हो, वहां परस्पर विवाद होते हैं और बच्चे आपस में भिड़ते हैं, पति-पत्नी में विवाद होता है। जहां बर्तन बेतरतीब पड़े रहते हैं, वहां झगड़े अधिक होते हैं। जिस घर में नियमित बिल-छिद्रों का भरण नहीं होता और चूहे-चींटियां निकलते हों, उस घर से संपदा का क्षरण होता है और बच्चों पर संकट आता है। यदि घर की सुंदरता पर ध्यान दिया जाए तो लक्ष्मी को मनाया जा सकता है। इस कार्य में महिलाओं की भागीदारी की बात महाभारत के अनुशासन पर्व में भी आई है-
प्रकीर्ण भांडामनवेक्ष्य कारिणीं सदा च भतरु: प्रतिकूल वादिनीम्। परस्य वेश्माभिरतामलज्जामेवं विधा ता परिवर्जयामि।

फेंगशुई में भी ऐसी अव्यवस्थाओं को नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाली कहा गया है। साथ ही सकारात्मक विचारों के लिए घर को नियमित और पूरी तरह व्यवस्थित करने पर जोर दिया जाता है, मूलत: यह विचार भारतीय आदर्श से प्रेरित है। इसीलिए हमारे यहां पर्व-त्योहार आदि के आगमन के मद्देनजर सर्वप्रथम घर की साज-संभाल करने का विचार निहित है। वस्तुत: यह नियमित होना चाहिए। इसमें सुख और समृद्धि का गहरा राज छिपा है।


डॉ. श्रीकृष्ण ‘जुगनू'

ज्योतिषियों की सलाह पर चलती जिंदगी

साइंस और टैक्नोलॉजी के इस युग में भी छोटे से लेकर बड़े-बड़े निर्णय ज्योतिषियों से पूछ कर ही लिए जा रहे हैं। बड़ी-बड़ी कॉपरेरेट कंपनियां नए ऑफिस के लिए जगह खरीदने से पहले, भूमि-पूजन, बिल्डिंग का निर्माण, नए ऑफिस में शिफ्ट होने से पहले ज्योतिषियों और वास्तु विशेषज्ञों की राय लेना नहीं भूलतीं। ऑफिस का कलर कंबीनेशन, फर्नीचर, बॉस के बैठने की जगह आदि सबकुछ वास्तु विशेषज्ञ और ज्योतिषि ही तय करते हैं।

टेस्ट और फैशन की दुनिया में भी ज्योतिषियों की घुसपैठ है। यही नहीं कुछ लोग रोगों का निवारण भी ज्योतिषि की सलाह पर कर रहे हैं। इस भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने खान-पान और सेहत की तरफ प्रॉपर ध्यान नहीं दे पाते। यही कारण है कि उनका विश्वास ज्योतिषियों पर दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है।

लोगों की ड्रैस तक ज्योतिषि तय कर रहे हैं। हर न्यूज चैनल से लेकर अखबारों में पंडितों की राय के न्यूज पैकेज दिए जा रहे हैं। इसमें राशियों के हिसाब से इंसान की पसंद के खान-पान, ड्रैस, रंग और कई ऑस्पैक्ट बताए जा रहे हैं। इंटरव्यू और एग्जाम के लिए ड्रैस भी ज्योतिषि डिसाइड कर रहे हैं।

राशि के हिसाब से खरीदें ड्रैस
मुंबई का लाइफ स्टाइल चेने स्टोर्स एक ऐसा बुकलेट तैयार कर रहा है, जिसमें लोगों की राशि के हिसाब से ड्रैस कलर दिए गए हैं। इसमें 27 डिजाइनर, ज्योतिषियों से सलाह-मशवरा करके ड्रैसेज तैयार कर रहे हैं। पंडित विनय जेतली का कहना है कि मीन राशि के लोगों को पीले, सफेद और लाल रंग के परिधान पहननें चाहिए। वहीं वृश्चिक राशि के लोगों के लिए लाल और पीले परिधान सेहत के लिए बिलकुल ठीक रहेंगे।

सिंह राशि के लोग नारंगी, पीले और गेहूं रंग के परिधान धारण करे, तो ये उनकी सेहत और स्वभाव का भी ध्यान रखते हैं। इसी तरह हर राशि के लोगों के लिए अलग-अलग परिधानों को पहनने से उनकी नकारात्मक किरणों का प्रभाव कम रहता है और पॉजीटिव एनर्जी मिलती है।

पार्टनर का चुनाव राशि के आधार पर
ज्योतिषि परषोतम साहनी ने बताया कि आजकल बिजनेस पार्टनर का चुनाव भी राशि के आधार पर किया जा रहा है। बिजनेस शुरू करने से पहले वे इस बात का पता करते हैं कि किस राशि से संबंधित व्यक्ति से उनमें आपसी तालमेल के साथ बिजनेस में मुनाफा होगा।

विदेश जाने से पहले लेते हैं सलाह
पंडित लक्ष्मी नारायण का कहना है कि विदेश में सेट होने और बिना रुकावट विदेश पहुंचने के लिए लोग पहले उनसे सलाह लेते हैं कि ग्रह-नक्षत्रों के हिसाब से वह किस दिन और किस समय घर से निकलें, ताकि कारोबार के साथ-साथ उनकी विदेश यात्रा भी सफल रहे। पंडित विजय कुमार भोला ने बताया कि उनके पास ऐसे बहुत से लोग आते हैं जो अपने करियर और जॉब को लेकर सलाह लेते हैं। इनमें कई बड़े स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं।

मैडिकल एस्ट्रोलॉजी से बीमारी दूर
मैडिकल एस्ट्रोलॉजर रचना शर्मा ने बताया कि 15 साल से मैडिकल एस्ट्रोलॉजी करते हुए उन्होंने कई लोगों को ठीक किया है। उन्होनें बताया कि दिल की नसें ब्लॉक होने वालों को सनेबहराव पहनना चाहिए। जिन लोगों का ब्लड प्रैशर लो है, उन्हें तांबे का कड़ा पहनना चाहिए, किडनी की बीमारी वालों को दाना फिंरग चांदी में डालकर पहनने से काफी आराम मिलेगा। अस्थमा के पेशेंट्स को सुच्चा मोती और पन्ना पहनना चाहिए।

अल्सर ठीक हो गया
अमित ने बताया कि उन्हें अल्सर था। मैडिकल एस्ट्रोलॉजर की सलाह पर उन्होंने सफेद मूंगा और सुच्चे मोती को धारण किया, जिससे उन्हें काफी आराम मिला। अब वह बिलकुल ठीक हैं।

हाउस वाइफ अनीता ने बताया कि उनकी एक फ्रैंड ने जब उन्हें बताया कि राशि के हिसाब से आजकल ज्योतिषि ड्रैस कलर का सुझाव देते हैं, तो उन्होंने भी काफी समय से ज्योतिषि की सलाह पर ही ड्रैस कलर चूज करना शुरू किया। इससे उन्हें काफी फायदा भी मिला है।