Monday, April 20, 2009

विभिन्न राशि के अनुसार अक्षय पर्व कैसे मनाएं

दृष्टि से स्वयंसिद्ध अक्षय तृतीया ईश्वरीय तिथि है। भगवद् आराधना, दान-पुण्य का विशेष पर्व है। कहा जाता है कि इस दिन दान करने से अनंत पुण्यफल की प्राप्ति होती है। दान अक्षय हो जाता है। त्रेतायुग के आरंभ से यह युगादि एवं परशुराम के जन्म से यह चिरंजीवी तिथि भी कहलाती है।
यह अक्षय कार्य करने का पुनीत पर्व भी है। इस वर्ष अक्षय तृतीया को सोमवार और कृत्तिका-रोहिणी नक्षत्र का संयोग प्राप्त हो रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से विभिन्न राशि के अनुसार अक्षय पर्व कैसे मनाएं तथा क्या दान करें, इसका निर्देश भी है। इसके अनुसार विविध राशि के अनुसार पर्व ऐसे मनाएं..
मेष
अग्नितत्व की इस राशि का स्वामी मंगल है। साहस, बुद्धि तथा मनोकामना पूर्ति हेतु आखातीज को उपवास कर संध्याकाल में लाल कपड़े में गेहूं तथा गुड़ का दान करें। संभव हो तो घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक का चिह्न् लगा दें। नए वाहन खरीदी के योग बनेंगे, आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। शेयर बाजार में निवेश हेतु समय उत्तम है।
वृषभ
रात्रि बली, दक्षिण दिशा स्वामिनी, शीत गुण व वायु प्रधान इस राशि का स्वामी शुक्र है। इस राशि के जातकों के लिए तृतीया विशेष फलदायी है। कृत्तिका तथा रोहिणी नक्षत्र का समागम अक्षय पर्व से हो रहा है। नित्यकर्म से निवृत्त हो भगवान बद्रीनारायण के मस्तक पर सफेद चंदन का तिलक लगाएं। सायं सफेद गाय का पूजन कर उसे घी चुपड़ी रोटी खिलाएं व सफेद वस्तुओं का दान करें। मनोकामना पूर्ण होगी।
मिथुन
बुद्धि प्रधान राशि के जातकों हेतु यह पर्व आत्मचिंतन का है। अपने अंदर छिपे अंधकार का त्याग कर अध्यात्म में रुचि बढ़ाएं। व्यर्थ के विवादों में समय बर्बाद नहीं करें। इससे कुछ हासिल नहीं होगा। भगवान परशुराम के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करें। दोपहर मिट्टी के कलश में जल भरकर उस पर आम के पत्ते एवं खरबूजा रख दान करें। चारों पुरुषार्थो की प्राप्ति हेतु गंगा का स्मरण कर गीता पाठ करें।
कर्क
विप्रवर्ण एवं चंद्र प्रधान राशि हेतु अक्षय पर्व सर्वत्र शुभ है। रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। लंबी दूरी की यात्रा के योग बनेंगे। आय के स्रोत में आकस्मिक वृद्धि से मन प्रफुल्लित रहेगा। प्रात: जल्दी उठकर माता-पिता के चरण स्पर्श के साथ दिन की शुरुआत करें। भगवान कृष्ण को चंदन चढ़ाकर पंचोपचार से पूजा करें। किसी गरीब व्यक्ति को पंखा दान करें।
सिंह
उग्र, शुष्क, अग्नितत्व प्रधान इस राशि का स्वामी सूर्य है। मन में नई-नई योजनाएं जन्म ले रही हैं। यह उनके क्रियान्वयन का उचित समय है। कम और तोल मोल कर बोलंे। प्रात: जल्दी उठकर जल से भरे कलश की स्थापना कर गंध, पुष्प, धूप, दीप एवं नैवेद्य से पूजन कर उसका दान करें। घर में सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहेगी। सांय परशुरामजी के चित्र पर लाल गंध लगाएं।
कन्या
द्विस्वभाव वाली पृथ्वी तत्व की इस राशि का स्वामी बुध है। नई संभावनाएं अंधकार को समाप्त कर जीवन को नए पथ पर ले जाएगी। वाणी पर नियंत्रण रखें। अक्षय तृतीया पर मस्तक पर केसर का तिलक लगाकर गणोशजी की आराधना करें। मोदक का नैवेद्य लगा परिजनों में वितरित करें। घर के बाहर पीपल का वृक्ष लगा उसकी आजीवन सेवा करें।
तुला
पश्चिम दिशा स्वामिनी इस राशि का स्वामी शुक्र है। वाहन सावधानी से चलाएं। काम तथा क्रोध का त्याग करें। लंबित योजनाओं के क्रियान्वयन का वह उचित समय है। लक्ष्मी नारायण के दर्शन कर उनके चरणों में ग्यारह फल-पुष्प समर्पित करें। तृतीया की सायं असहाय व्यक्ति को खरबूजे का दान करें।
वृश्चिक
विप्रजाति, जलीय उत्तर दिशा स्वामिनी, शीर्षोदयी इस राशि का स्वामी मंगल है। शनि-मंगल के समसप्तक योग के चलते घरेलू वातावरण प्रभावित होगा। प्रदोषकाल में परशुरामजी की शोभायात्रा में पैदल चलकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करें। नई संस्था एवं भवन प्रवेश हेतु उचित समय है। जमीन, जायदाद, स्थायी संपत्ति खरीदी हेतु श्रेष्ठ दिन।
धनु
उग्र, पूर्व दिशा की स्वामी इस राशि का स्वामी गुरु है एवं अर्थ है धनुष। धार्मिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। नए वस्त्र एवं आभूषण खरीददारी का श्रेष्ठ दिन है। तीर्थाटन के अवसर बनेंगे। अक्षय पर्व पर गरीब एवं असहाय व्यक्तियों को चरण पादुका का दान करें। कन्याएं गौरी का पूजन करें। संध्याकाल भगवान बद्रीनारायण का षोडशोपचार पूजा कर अखंड दीप जलाए।
मकर
शीतवर्ण, शीतप्रधान, पृष्ठोदयी। इस राशि का स्वामी शनि है। विद्यार्थियों हेतु उत्तम समय। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रारंभ करने का शुभ दिन। नौकरीपेशा व्यक्तियों को पदोन्नति के अवसर प्राप्त होंगे। महत्वाकांक्षाएं बढ़ेगी। सुख, समृद्धि एवं सफलता हेतु मौनव्रत धारण कर लक्ष्मीनारायण के चित्र का पूजन करें।
कुंभ
शनि प्रधान स्निग्ध कांति वाली यह राशि स्थिर एवं दृढ़ है। खर्चो की अधिकता बनी रहेगी। भय की स्थिति रहेगी। एकाग्रता के साथ भगवत आराधन करें। घर में छोटे बच्चों को मान-सम्मान दें। प्रात: जलपूरित घट का दशोपचार विधि से पूजन कर ब्राrाण को दान दें। प्रदोषकाल में परशुरामजी का ध्यान करें।
मीन
जलतत्व प्रधान, उत्तर दिशा की स्वामी, द्विस्वभाव वाली राशि का स्वामी गुरु है। ऐश्वर्य तथा सुख समृद्धि में वृद्धि होगी। रोजमर्रा के कार्यो में मन लगाएं। महिलाएं गौरी पूजन कर कन्याओं को भोजन कराएं। गरीब व्यक्ति को छाता एवं घट (जल से भरा) दान करें। पुरुष जौ एवं पीले चंदन से विष्णुपूजा कर गंगादि पवित्र नदियों का स्मरण करें। चारों पुरुषार्थो की प्राप्ति होगी तथा वंशवृद्धि होगी।

No comments:

Post a Comment