Tuesday, February 16, 2010

व्यवस्थित घर में आती है सुख और संपदा

व्यवस्थित घर सुख ही नहीं, बल्कि समृद्धि भी देता है जबकि अव्यवस्थित घर न केवल परेशानियां देता है बल्कि झगड़ों, स्वास्थ्य समस्याओं समेत बेवजह धन और ऊर्जा का अपव्यय भी करवाता है। अत: घर में कभी फालतू चीजें नहीं रखें, सामान को बिखराकर नहीं रखें।

हमारी सनातन परंपरा में घर को आश्रम का दर्जा दिया गया है। गृहस्थी को साधना से कम नहीं माना गया है। जिस घर में साजो सामान व्यवस्थित हो, जो चीज जहां चाहिए, वहीं हो तो ऐसा व्यवस्थित घर सुख ही नहीं, बल्कि समृद्धि भी देता है जबकि अव्यवस्थित घर न केवल परेशानियां देता है बल्कि झगड़ों, सिरदर्द, बेवजह दिक्कतों के साथ-साथ धन और ऊर्जा का अपव्यय भी करवाता है।

वास्तुशास्त्र वस्तुत: गृह-निर्माण में संतुलन पर सर्वाधिक जोर देता है। निर्माण के समय दिशा, काल और स्थान के अनुसार जो चीज जहां पर होनी चाहिए, तद्नुसार ही नियमों का निर्देश किया गया है। घर से बड़ा कोई स्वर्ग नहीं, ऋषि-मुनि ही नहीं, देवता तक गृहस्थ के आश्रित कहे गए हैं। गृहस्थ को यह निर्देश है कि वह परिवार में स्थान, वस्तुओं के संतुलन के साथ ही वैचारिक समरसता भी बनाए रखें।

वास्तुमंडनम् के दूषणभूषणाध्याय में गृह और गृहस्थी के नियमों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। इसमें कहा गया है कि घर में कभी फालतू चीजें नहीं रखें, सामान को बिखराकर नहीं रखें। रसोई के बर्तनों से लेकर पुस्तकों, बनाव-श्रंगार के सामान, कांच, कंघी तक को व्यवस्थित रखें। इनके बिखरे होने पर संपत्ति का क्षय होता है। जिस घर में महिलाओं के केश उड़ते रहते हैं, वहां मर्यादा का उल्लंघन होता और लक्ष्मी रुष्ट हो जाती है।

जहां बार-बार नमक बिखरता हो, वहां परस्पर विवाद होते हैं और बच्चे आपस में भिड़ते हैं, पति-पत्नी में विवाद होता है। जहां बर्तन बेतरतीब पड़े रहते हैं, वहां झगड़े अधिक होते हैं। जिस घर में नियमित बिल-छिद्रों का भरण नहीं होता और चूहे-चींटियां निकलते हों, उस घर से संपदा का क्षरण होता है और बच्चों पर संकट आता है। यदि घर की सुंदरता पर ध्यान दिया जाए तो लक्ष्मी को मनाया जा सकता है। इस कार्य में महिलाओं की भागीदारी की बात महाभारत के अनुशासन पर्व में भी आई है-
प्रकीर्ण भांडामनवेक्ष्य कारिणीं सदा च भतरु: प्रतिकूल वादिनीम्। परस्य वेश्माभिरतामलज्जामेवं विधा ता परिवर्जयामि।

फेंगशुई में भी ऐसी अव्यवस्थाओं को नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाली कहा गया है। साथ ही सकारात्मक विचारों के लिए घर को नियमित और पूरी तरह व्यवस्थित करने पर जोर दिया जाता है, मूलत: यह विचार भारतीय आदर्श से प्रेरित है। इसीलिए हमारे यहां पर्व-त्योहार आदि के आगमन के मद्देनजर सर्वप्रथम घर की साज-संभाल करने का विचार निहित है। वस्तुत: यह नियमित होना चाहिए। इसमें सुख और समृद्धि का गहरा राज छिपा है।


डॉ. श्रीकृष्ण ‘जुगनू'

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