Sunday, December 6, 2009

व्यक्ति के कर्म बनाते हैं बृहस्पति को शुभ-अशुभ

व्यक्ति के कर्म बनाते हैं बृहस्पति को शुभ-अशुभ  बृहस्पति नवग्रहों में सबसे शुभ है। कुंडली में शुभ बृहस्पति की स्थिति राजयोग कारक है। लाल किताब में बृहस्पति को जगत गुरु और ब्रह्मा जी महाराज कहा गया है। उच्च या प्रबल बृहस्पति वाले व्यक्ति का माथा चौड़ा और रंगत सोने जैसी होती है। ऐसे व्यक्ति का बोलचाल गुरु की तरह गंभीर, नेक और बड़प्पन से युक्त होता है। वह आत्मविश्वास से भरपूर और धर्म के रास्ते पर चलने वाला होगा।

बृहस्पति का पक्का घर कुंडली का नवम भाव है, इसके अलावा यह एक से पांच भाव और 12वें भाव में भी शुभ असर देता है। आमतौर पर छठे, सातवें, आठवें और दसवें घर में बृहस्पति का मंदा असर सामने आता है। लाल किताब के अनुसार बृहस्पति के मंदे या नेक असर को समझने के लिए हमें कुंडली के सभी घरों और उनमें स्थित ग्रहों को भी देखना जरूरी है। यदि दूसरे, पांचवें, नौवें और बारहवें भाव में बृहस्पति के शत्रु ग्रह हों, जैसे शुक्र, बुध और राहु या ये ग्रह बृहस्पति के साथ हों, तो बृहस्पति का असर मंदा होगा। यदि बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में या चौथे भाव में हो या अपने कारक घरों (2,5,9,12) में हो, तो शुभ असर होगा।

बृहस्पति मान-सम्मान, संतान सुख और विद्या का कारक है। बृहस्पति के निर्बल होने पर या अपने कर्मो द्वारा निर्बल कर लिए जाने पर इसके शुभ फल नष्ट हो जाते हैं। व्यक्ति के अपने आचरण, व्यवहार, कामकाज, रिश्तेदारों, मकान तथा अन्य कई प्रकार की स्वयं से जुड़ी स्थितियों, चीजों और हालातों से भी किसी ग्रह का असर प्रभावित होता है। जैसे यदि बृहस्पति कुंडली में नौवें घर में हो और किसी भी तरीके से अशुभ न हो। लेकिन ऐसी स्थिति में यदि व्यक्ति पीपल के दरख्त कटवाए या पिता, साधु-संतों, बुजुर्गो, ब्राह्मणों की अवहेलना या अपमान करने लगे तो उसका उत्तम बृहस्पति भी निष्फल हो जाएगा। ऐसे समय सिर पर चोटी के स्थान के बालों का उड़ना, शिक्षा में अड़चनें आना, सोना चोरी होना, बेचना या खोना, बदनामी होना, झूठी अफवाहें फैलना आदि बृहस्पति के अशुभ असर की निशानी होती हैं।

कुंडली में मित्र ग्रहों सूर्य, चंद्रमा और मंगल के साथ युति होने से बृहस्पति की शक्ति में वृद्धि होती है और शुभ फल मिलते हैं। सूर्य के साथ होने पर बृहस्पति प्रतिष्ठा दिलाता है। बुध, शुक्र और राहु, बृहस्पति के शत्रु ग्रह हैं और दृष्टि या युति द्वारा इसके असर को प्रभावित करते हैं। ऐसे में बृहस्पति के मित्र ग्रहों के उपाय से सहायता मिलती है। शुक्र द्वारा बृहस्पति पीड़ित हो तो सूर्य और मंगल के उपाय सहायक होते हैं। इसी प्रकार राहु से बृहस्पति पीड़ित हो तो सूर्य, चंद्र और मंगल के उपाय सहायक होते हैं।

यदि जन्मकुंडली में बृहस्पति सातवें घर में हो, तो घर में मंदिर बनाने और रोज पूजा-पाठ करने से इसका फल मंदा हो जाता है। घर में रखी चीजें, व्यक्ति का आचरण, व्यवहार आदि भी जन्म पत्रिका के ग्रहों के फल पर शुभ या अशुभ असर डालता है। कुंडली के दसवें घर में बृहस्पति हो तो घर के पश्चिम भाग में पूजा स्थान बनाने से भी बृहस्पति मंदा प्रभाव देते हैं, क्योंकि दसवें भाव में बृहस्पति नीच का माना जाता है।

सुमन पंडित

1 comment:

  1. santosh pusadkar आप ने जो बताया सही है. आप को धन्यवाद करता हू .शुक्र की महादशा १३ ऑक्ट २००९ सुरु हो गायी है.कन्या लग्न कुंडली है. केतू दिव्तीय मै , शनी तृतीय ,गुरु पंचम बुध शुक्र.चंद्र सप्तम मै , रवी राहू अष्टम मै. मंगल नअवं मै है . कृपया मागदर्शन करे.

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