Sunday, November 15, 2009

सोमवती अमावस्या का महत्व

सोमवार और अमावस्या का योग कभी-कभी बनता है। शास्त्रों में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान शिव के दर्शन एवं जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है। सोलह नवंबर 2009 विशाखा नक्षत्र में अमावस्या सोमवार प्रात: 11 बजकर 11 मिनट पर धनु लग्न में प्रवेश करेगी।


इस दिन सोमवती अमावस्या और मार्गशीर्ष संक्रांति एक साथ होने से तीर्थो पर स्नान, दान-जाप आदि का महात्म्य बढ़ जाता है। धर्मनिष्ठ लोग इस दिन व्रत का संकल्प लेकर अपने इष्टदेव एवं भगवान विष्णु एवं शिव पूजन करने से आत्मिक शांति प्राप्त कर सकते हैं। अशुभ ग्रहों के प्रभाव को कम करने के लिए पीपल वृक्ष की सफाई और गंगाजल युक्त दुग्ध से सींचकर धूप-दीप आदि से पूजन करके कम से कम 7 बार प्रदक्षिणा करना कल्याणकारी होगा।


सुबह संक्रांति की शुभ बेला में ब्राrाणों को दक्षिणा सहित भोजन, वस्त्र, फलों का दान करने का सुअवसर प्राप्त होगा। मार्गशीर्ष माह में पांच मंगलवार, राहु-केतु का राशि परिवर्तन और सूर्य के राशि परिवर्तन से विभिन्न राशियों के जातकों पर भिन्न-भिन्न असर पड़ेगा। ग्रहों का शुभ व अशुभ प्रभाव जीवन को पूर्ण प्रभावित करता है। ग्रह ईश्वर के प्रतिनिधि हैं जो जीवात्माओं के कर्म फल का भुगतान कर जीवात्मा को शुद्ध व पवित्र बनाने का कार्य करते हैं। ग्रहों द्वारा अशांति व अनिष्टों से छुटकारा पाने के लिए हमें ईश्वर ने कई अवसर प्रदान किए हैं। सोमवती अमावस्या एवं संक्रांति बेला एक साथ आकर यह सुअवसर प्रदान कर रही है।


सोमवती अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करके तुलसीजी, शंकर-पार्वतीजी की विधि-विधान सहित पूजा करके मां गौरी को सिंदूर चढ़ा श्रंगार की वस्तुएं श्रद्धापूर्वक भेंट करनी चाहिए। पूजा के बाद चढ़ाए हुए सिंदूर में से थोड़ा लेकर सुहागिनें अपनी मांग में भरकर मां पार्वतीजी से अखंड सुहाग एवं सौभाग्य के लिए प्रार्थना करें। यह पुण्यकाल देवताओं को भी दुर्लभ होता है। इस दिन व्रत करने वाले प्रात:काल उठकर स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और पीपल वृक्ष के समीप जाकर उसकी जड़ सहित भगवान विष्णु का पूजन करें।



गोविंदजी के पूजन में पीले वस्त्र, अक्षत, फूल, फल तथा नैवेद्य इत्यादि पदार्थो का प्रयोग किया जाता है। इस समय कई प्रकार के रत्न, सोना, चांदी, हीरा-मोती मणियों को हाथ में लेकर भी पूजा की जाती है। यदि सामथ्र्य न हो तो फल, पुष्प, नैवेद्य, वस्त्रादि से तांबे का पात्र या एक सुपारी से भी 107 प्रदक्षिणा पूर्ण की जा सकती हैं। पूजा के समापन पर सभी वस्तुएं ब्राrाण को दान कर देनी चाहिए। इस प्रकार किए गए व्रत से कुंवारी कन्याओं को अच्छा वर एवं सुहागिन स्त्रियों को सुपुत्र एवं धन की प्राप्ति होती है।


मां गौरी को ऐसे करें प्रसन्न


विभिन्न राशियों के जातक कुछ उपयोगी उपाय करके ग्रहों की अशुभता को दूर कर सकते हैं। भगवान शिव-पार्वती व विष्णु की आराधना कर अखंड सौभाग्य एवं निरोगी काया प्राप्त करें।

मेष- मां पार्वती को लाल चुनरी व श्रंगार की वस्तुएं अर्पित करें। गुड़ व मसूर की दाल की पोटली बनाकर संध्या के समय किसी गरीब या भिखारी को दें। भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते व पीले पुष्प अर्पित करें।


वृष- मां पार्वती को गुलाबी रंग की चुनरी भेंट करें। चांदी के लोटे में गंगाजल व तुलसी के पत्ते को डालकर भगवान विष्णु को जल अर्पण करें। सफेद चावल सफेद कपड़े में बांधकर एक पोटली सुबह किसी गरीब स्त्री को दान करें। सफेद बर्फी का भगवान विष्णु को भोग लगाएं।


मिथुन- मां पार्वती को हरे रंग की चुनरी और मेंहदी भेंट करें। भगवान विष्णु को तुलसी के पत्तों की माला अर्पण करना शुभ होगा। मिश्री और इलायची का भोग लगाएं। पोटली में मूंग की दाल बांधकर प्रात:काल ब्राrाण को दान करें।


कर्क- मां पार्वती को लाल रंग की चुनरी और पीली चूड़ियां भेंट करें। भगवान विष्णु को चंदन का टीका व पीतांबरी वस्त्र भेंट करें। बेसन की बर्फी का भोग लगाएं। दूध और पोटली में चावल या चीनी का दान किसी ब्राrाणी को करें।


सिंह- सुनहरी या नारंगी रंग की चुनरी मां पार्वती को भेंट करें। भगवान विष्णु को पीले फूलों की माला अर्पण करें। बेसन के लड्डुओं का भोग लगाएं। एक पोटली में गुड़ व गेहूं बांधकर किसी ब्राrाण को दान करें।


कन्या- मां गौरी को हरे रंग की चुनरी भेंट करें। भगवान विष्णु को तुलसी के पत्तों की माला व पेठा भोग लगाएं। मिश्री और इलायची भी भेंट करें। हरी मूंग व पांच इलायची हरी पोटली में बांधकर किसी ब्राrाण को दान करें।


तुला- मां गौरी को गुलाबी या आसमानी रंग की चुनरी भेंट करें। भगवान विष्णु को मिश्री व तुलसी के पत्ते अर्पण करें। चावल व चीनी सफेद वस्त्र में बांधकर किसी महिला या ब्राrाणी को दान करें। बर्फी का भोग लगाकर पांच कन्याओं को प्रसाद भी दें।


वृश्चिक- मां गौरी को लाल या पीली चुनरी भेंट करें। भगवान विष्णु को लड्डुओं का भोग लगाएं। पीतांबरी वस्त्र भेंट करें। गुड़ व गेहूं एक पोटली में बांधकर किसी ब्राrाण को दान करें। भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पण करें।


धनु- मां गौरी को पीली चुनरी, लाल चूड़ियां भेंट करें। भगवान विष्णु को बेसन के लड्डुओं का भोग लगाएं। पीतांबरी वस्त्र भेंट करें। पीली चने की दाल, हल्दी की गांठ, गुड़ पीले वस्त्र में बांधकर विद्वान ब्राrाण को दान करें ।


मकर- हरी चुनरी और मेंहदी मां गौरी को भेंट करें। भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते व मिश्री भेंट करें। तुलसी की माला भेंट करें। उड़द की दाल व गुड़ पोटली में बांधकर किसी असहाय गरीब व्यक्ति को दान करें।


कुंभ- हरी चुनरी और हरी चूड़ियां मां गौरी को भेंट करें। भगवान विष्णु को तुलसी के पत्तों की माला चढ़ाएं। बर्फी का भोग लगाएं। उड़द की दाल व गुड़ किसी गरीब भिखारी को दान करें।

मीन- मां गौरी को पीले या लाल रंग की चुनरी चढ़ाएं। भगवान विष्णु को पीले फूलों की माला अर्पित करें। बेसन की बर्फी का भोग लगाएं। पीली चने की दाल, गुड़ व हल्दी एक पोटली में बांधकर किसी ब्राrाण को दान करें।

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