Saturday, November 21, 2009

चौघड़िया कैसे देखें - पं.विनोद राजाभाई राबल

भारतीय संस्कृति में प्रत्येक कार्य को करने से पहले उसकी सफलता के लिए शुभ मुहूर्त में उसे प्रारंभ करने की परंपरा चली आ रही है। शास्त्रों में भी प्रत्येक कार्यो के लिए अलग-अलग मुहूर्त सिद्धांत दिए गए जिसके अनुसार पंचांग के माध्यम से गणना कर शुद्ध मुहूर्त की तिथि, वार, नक्षत्र, माह एवं समय का निर्धारण किया जाता रहा है। परंतु कई बार परिस्थितिवश या अन्य किसी कारण से निर्धारित मुहूर्त न मिलने के कारण उस दिन विशेष का चौघड़िया देखकर ही कार्य का संपादन किया जाता है।
एक दिन-रात में कुल 24 घंटे होते हैं तथा दिन-रात में आठ-आठ।इस प्रकार पूरे दिन में कुल 16 चौघड़िये होते हैं। जनसाधारण प्रात:काल 6 से 7.30 प्रथम एवं 7.30 से 9.00 तक दूसरा चौघड़िया मानकर गणना कर लेते हैं परंतु यह गणना सही और सर्वमान्य नहीं है। वास्तव में चौघड़िये की गणना में निर्धारित स्थान के सूर्योदय से सूर्यास्त मध्य के कुल समय में 8 का भाग देने (अर्थात आठ हिस्सों में बांट देने) से जो समय आएगा वह समय एक चौघड़िया का होगा।
उदाहरण के लिए दिनांक ३0.04.२क्क्८ को उज्जैन में सूर्योदय 6.05 पर है तथा सूर्यास्त 6.47 पर। सूर्योदय एवं सूर्यास्त का अंतर (प्रात: ६.क्५ से संध्या ६.४७ तक) 12 घंटे एवं 42 मिनट है। अब इस समय (12 घंटे 42 मिनट) के 8 बराबर भाग किए तो एक भाग 1 घंटा 35 मिनट एवं 15 सेकंड का हुआ। अर्थात सूर्योदय 6.05 पर उस दिन से 1 घंटा 35 मिनट एवं 15 सेकंड (7 बजकर 40 मिनट एवं 15 सेकंड) तक उद्वेग चौघड़िया रहेगा।
चौघड़िया चक्र अनुसार रविवार को प्रथम चौघड़िया उद्वेग का है। इस प्रकार चौघड़िया 7.40.15 से चर का चौघड़िया प्रारंभ होगा। जिस प्रकार दिन का चौघड़िया सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को मानते हैं, उसी प्रकार सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय के मध्य के समय को बराबर आठ भागों में बांट कर चौघड़िया चक्र से निर्धारित रात का चौघड़िया ज्ञात किया जा सकता है।
तालिका में प्रत्येक अंग्रेजी माह के औसतन चौघड़िये का समय दिया गया है जिससे जनसाधारण ज्योतिषीय गणना से बच सकेंगे। रोग, उद्वेग, काल के चौघड़िये अशुभ श्रेणी में आते हैं। लाभ, अमृत, शुभ, चल के चौघड़िये श्रेष्ठ चौघड़िये की श्रेणी में आते हैं। लाभ-लाभदेयता हेतु, अमृत - शुभ - शुभ एवं अमृत (औषधि) कार्यो हेतु तथा चल-चलने वाले (मशीनरी आदि) कार्यो के लिए उत्तम रहते हैं।
प्रत्येक दिन के पहले चौघड़िया
दिन- वार- रात
उद्वेग- रविवार- शुभ
अमृत- सोमवार- चल
रोग- मंगलवार- काल
लाभ- बुधवार- उद्वेग
शुभ - गुरुवार- अमृत
चल- शुक्रवार- रोग
काल- शनिवार- लाभ
औसतन चौघड़िये का समय
माह - दिन- रात
(घ : मि)-(घं : मि)
जनवरी- 1:21 - 1:39
फरवरी- 1:25- 1:35
मार्च- 1:29- 1:31
अप्रैल- 1:34- 1:26
मई- 1:38- 1:21
जून- 1:38- 1:19
जुलाई- 1:39- 1:21
अगस्त- 1:36- 1:24
सितंबर- 1:39- 1:29
अक्टूबर- 1:26- 1:34
नवंबर- 1:22- 1:38
दिसंबर- 1:20- 1:40

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